भारत में खेती आज-भी अनेक चुनौतियों से घिरी है — सिंचाई के लिए बिजली कटौती, डीजल पंप की महंगाई, समय पर पानी नहीं मिलना, और इससे किसानों की फसल तथा आय पर असर पड़ता है। इस समस्या को हल करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है — PM‑KUSUM Yojana। 2025 में यह योजना और भी बेहतर हो चुकी है, जिसमें किसानों को सोलर पंप लगाने पर **90% तक की सब्सिडी** मिल रही है।
योजना का परिचय और इतिहास
“KUSUM” का पूरा नाम है “Kisan Urja Suraksha evam Utthaan Mahabhiyan”। यह Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) द्वारा शुरू की गई है। योजना का उद्देश्य है खेतों में नियमित, भरोसेमंद और स्वच्छ ऊर्जा-सिंचाई स्रोत उपलब्ध कराना, ताकि किसानों की निर्भरता डीजल व बिजली ग्रिड पर कम हो सके।
योजना की शुरुआत मार्च 2019 में हुई थी। यह भारत में एक बड़ी हरी ऊर्जा पहल है जिसमें कृषि-सिंचाई से जुड़ी ऊर्जा लागत को कम करना और किसानों को ऊर्जा उत्पादक बनाना शामिल है।
योजना के प्रमुख घटक (Components)
PM-KUSUM योजना तीन मुख्य घटकों (Components) में विभाजित है
- Component A निर्जल भू-भाग/स्टिल माउंटेड ग्रिड-कनेक्टेड सौर या अन्य नवीकरणीय ऊर्जा आधारित पावर प्लांट्स (500 kW से 2 MW तक) लगाना।
- Component B “Standalone” सोलर कृषि पंप्स की स्थापना — उन क्षेत्रों के लिए जहाँ ग्रिड सप्लाई उपलब्ध नहीं है।
- Component C मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंप्स का सोलराइजेशन — यानी पंप को सोलर सिस्टम से चलाना और अति उत्पादित बिजली ग्रिड को बेचना।
इन घटकों के माध्यम से योजना का लक्ष्य है मार्च 2026 तक लगभग 34,800 MW सौर ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना।

2025 में सब्सिडी व लाभ का नया ढाँचा
2025 में इस योजना में सब्सिडी का स्तर काफी बढ़ गया है, जिससे किसानों की हिस्सेदारी कम हुई है और लाभ बढ़ा है। उदाहरण के लिए:
- कुछ राज्य-शासन में 90% तक सब्सिडी देने की व्यवस्था है।
- मूल रूप से केंद्र + राज्य की साझेदारी से सब्सिडी दी जाती है।
नीचे एक अनुमानित सब्सिडी / लागत तालिका दी जा रही है (राज्य-अनुसार अलग-हो सकती है)
| पंप क्षमता | कुल अनुमानित लागत | सरकारी सब्सिडी % | किसान हेतु हिस्सेदारी |
|---|---|---|---|
| 2 HP | ₹1.25 लाख | 80-90% | ₹10,000-₹20,000 |
| 3 HP | ₹1.80 लाख | 70-85% | ₹20,000-₹40,000 |
| 5 HP | ₹2.80 लाख | 60-80% | ₹40,000-₹60,000 |
| 7.5 HP | ₹4.50 लाख | 60-70% | ₹1.20 लाख-₹1.80 लाख |
| 10 HP | ₹6.50 लाख | 50-60% | ₹2.00 लाख-₹2.50 लाख |
ध्यान दें: ये आंकड़े राज्य, जमीन की स्थिति, पंप मॉडल और अन्य ఖर्चो पर निर्भर करते हैं। लगभग जानकारी के लिए।
क्यों यह किसानों के लिए “खेल बदलने वाली” योजना है?
इसका कारण बहुत स्पष्ट है — इस योजना के माध्यम से किसान निम्न लाभ उठा सकते हैं:
- बिजली/डीजल की लागत में भारी कमी सोलर पंप से डीजल खर्च समाप्त-लगभग हो जाता है।
- समय-सिंचाई सुनिश्चित बिजली कटौती या डीजल मिस-मैनेजमेंट से परेशान किसान अब समय पर सिंचाई कर सकते हैं।
- उत्पादन में वृद्धि नियमित सिंचाई होने से फसल की पैदावार बढ़ती है।
- अतिरिक्त आमदनी यदि पंप मॉडल ग्रिड-कनेक्टेड है, तो किसान अतिरिक्त सौर बिजली बेचकर आय बना सकते हैं।
- पर्यावरण-हित में डीजल-इरिगेशन हटने से कार्बन उत्सर्जन कम होगा, हरित खेती संभव होगी।
राज्य-वार स्थिति व उदाहरण
कुछ राज्यों में इस योजना की प्रगति बहुत तेज हुई है, उदाहरण स्वरूप:
- Rajasthan ने 1,000 MW से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता हासिल की है और लगभग 1.7 लाख किसानों को दिन में बिजली मिलनी शुरू हुई है।
- Maharashtra में पंप-सब्सिडी के लिए 90-95% तक की दरें चर्चा में आई हैं।
यह दर्शाता है कि योजना सिर्फ कागज़ों पर नहीं, बल्कि वास्तविक रूप में लागू हो रही है।
पात्रता (Eligibility) – कौन आवेदन कर सकता है?
इस योजना का लाभ निम्नलिखित पात्र लोग ले सकते हैं
भारत का नागरिक होना चाहिए।
कृषि भूमि का मालिक होना या पट्टे द्वारा खेती करना।
उस जमीन पर बिजली कनेक्शन या डीजल पंप का उपयोग होना चाहिए (स्थिति-अनुसार)।
आधार कार्ड और बैंक खाता होना अनिवार्य है।
कई राज्यों में “छोटे व सीमांत किसान” को प्राथमिकता दी जाती है।
आवश्यक दस्तावेज़
आवेदन के दौरान यह दस्तावेज़ तैयार रखें
- आधार कार्ड
- खसरा-खतौनी या भूमि प्रमाण पत्र
- बैंक पासबुक या बैंक जानकारी
- मोबाइल नंबर (OTP के लिए लिंक)
- पासपोर्ट फोटो
- बिजली कनेक्शन/डीजल पंप उपयोग का प्रमाण (यदि लागू हो)
आवेदन प्रक्रिया – स्टेप-बाय-स्टेप
नीचे आसान कदम दिए गए हैं — उन्हें फॉलो करें ताकि आपका आवेदन सही तरीके से हो जाए और जल्दी मंजूर हो जाए:
- अपने राज्य के “Renewable Energy Department” या MNRE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ। 16
- “Apply for Solar Pump” या “KUSUM Yojana Registration” लिंक पर क्लिक करें।
- नाम, पता, मोबाइल नंबर, आधार नंबर भरें तथा OTP वेरिफाई करें।
- भूमि का विवरण (खसरा/खतौनी) अपलोड करें।
- सोलर पंप की क्षमता चुनें (2 HP, 3 HP, 5 HP आदि)।
- Approved Vendor या कम्पनी का चयन करें।
- सब्सिडी की जानकारी देखें और अपनी हिस्सेदारी के लिए बैंक ऋण विकल्प देखें।
- वित्तीय अनुबंध व पेमेंट करें (किसान की हिस्सेदारी)।
- इंस्टॉलेशन की तारीख तय करें और तकनीकी टीम द्वारा पंप लगवाएँ।
- स्थापना के बाद सत्यापन करें, फाइनल सब्सिडी मिल जाती है।
लागत-बचत एवं आर्थिक विश्लेषण
आइए देखें एक उदाहरण: एक किसान 5 HP सोलर पंप लगाता है –
- मान लीजिए लागत ₹2.80 लाख है।
- सरकारी सब्सिडी 70% → ≈ ₹1.96 लाख।
- किसान हिस्सा ≈ ₹84,000।
- यदि बिजली या डीजल पंप में वर्ष में ₹50,000 खर्च होता था, अब वह खर्च लगभग शून्य हो गया।
- उत्पादन में 30% वृद्धि हो सकती है → अधिक मुनाफा।
- अगर अतिरिक्त उत्पादन से या बेचे गए सौर विद्युत् से ₹30,000/वर्ष की आय हो जाए, तो निवेश जल्दी वापस आ जाता है।
इस प्रकार, 5–6 वर्षों में निवेश का पूरा लाभ मिलना संभव है, इसके बाद शुद्ध लाभ शुरू हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1 क्या सिर्फ छोटे किसान ही आवेदन कर सकते हैं?
A नहीं — योजना में सभी आकार के किसान, FPOs, पंचायत, यूनियन भाग ले सकते हैं। 17
Q2 क्या मैं अपनी पुरानी बिजली पंप को सोलर में बदल सकता हूँ?
A हाँ — Component C के तहत ग्रिड-कनेक्टेड पंप को सोलर में बदलना शामिल है।
Q3 क्या मैं सौर पंप द्वारा उत्पन्न बिजली बेच सकता हूँ?
A हाँ — योजना में इस विकल्प को शामिल किया गया है ताकि किसान अतिरिक्त बिजली बेचकर आय बना सकें। 18
Q4 आवेदन कब तक मंजूर होगा?
A राज्य व सुनिश्चित प्रक्रिया पर निर्भर करता है — आमतौर पर कुछ हफ्तों से 2-3 महीने तक लग सकते हैं।
Q5 क्या कोई जोखिम है?
A निम्न-गलतियों से रिजेक्शन हो सकता है — गलत दस्तावेज़, अप्रूव्ड Vendor नहीं, आवेदन अधूरा रखना या किसान हिस्सेदारी नहीं देना।
सफलता-कहानियाँ
भारत के विभिन्न जिलों में इस योजना से किसानों ने बड़े बदलाव देखे हैं — जैसे एक किसान ने 3 HP सोलर पंप लगवाया, डीजल खर्च समाप्त किया, और अतिरिक्त 2 एकड़ में खेती बढ़ाई। (यह एक काल्पनिक उदाहरण है, लेकिन वास्तविक अनुभव समान हैं)।
योजना से जुड़ी चुनौतियाँ और सुझाव
योजना बहुत अच्छी है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी सामने आती हैं:
- कुछ इलाकों में Approved Vendor की उपलब्धता कम है।
- किसानों को बैंक ऋण व हिस्सेदारी का इंतजाम करना पड़ता है।
- स्थापना के बाद मेंटेनेंस व तकनीकी सहायता की कमी हो सकती है।
- कुछ राज्यों में प्रक्रिया जटिल हो सकती है।
सुझाव किसान आवेदन से पहले नोडल एजेंसी से पूरी जानकारी लें, प्रस्तावित Vendor देखें, आवेदन समय पर पूरा करें, और जितना हो सके समूह आवेदन देखें — ग्रुप/एफपीओ के माध्यम से आवेदन करने से लाभ मिल सकता है।
PM‑KUSUM Yojana 2025 में किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर है — जो सिंचाई की परेशानी, बिजली व डीजल के खर्च और खेती की अनिश्चितताओं से छुटकारा दिला सकता है। सोलर पंप लगाने से लागत कम होती है, उत्पादन बढ़ता है, और अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलता है।
अगर आप किसान हैं, तो आज ही आवेदन प्रक्रिया शुरू करें — अपने खेत व भविष्य को सशक्त बनाएं।
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