कृषि में सोलर सिस्टम लगाकर करें डबल कमाई — जानिए सरकार की 2025 की नई सब्सिडी योजना

कृषि में सोलर सिस्टम सब्सिडी 2025 भारत में किसानों के लिए सोलर ऊर्जा एक नई क्रांति साबित हो रही है — जानिए पूरी प्रक्रिया, खर्च, सब्सिडी और मुनाफे की कहानी।


सोलर खेती क्यों है भविष्य की खेती

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां खेती में बिजली और पानी की समस्या अक्सर किसानों को परेशान करती है। लेकिन अब सोलर ऊर्जा यानी सूरज की रोशनी से बिजली बनाने की तकनीक किसानों के जीवन में क्रांति ला रही है।
सोलर सिस्टम लगाकर किसान अपनी जरूरत की बिजली खुद बना सकते हैं और अतिरिक्त बिजली सरकार को बेचकर अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं।

कृषि में सोलर सिस्टम लगाने से बिजली बिल खत्म होता है, डिजल पंप की जरूरत घटती है, और खेती पर्यावरण अनुकूल बनती है। यही कारण है कि आज भारत सरकार किसानों को 60% तक की सब्सिडी देकर सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित कर रही है।

सोलर सिस्टम क्या है और यह खेती में कैसे काम करता है?

कृषि में सोलर सिस्टम सब्सिडी 2025 में सोलर सिस्टम एक ऐसी तकनीक है जो सूरज की रोशनी को विद्युत ऊर्जा में बदल देती है। इसमें सोलर पैनल, इनवर्टर, बैटरी, और पंप सेट का उपयोग होता है। यह बिजली सिंचाई, मोटर, लाइट और अन्य कृषि उपकरण चलाने में काम आती है।

सोलर सिस्टम के प्रमुख भाग

  • सोलर पैनल सूरज की रोशनी को बिजली में बदलता है।
  • इनवर्टर डीसी करंट को एसी करंट में बदलता है।
  • बैटरी दिन में बनी बिजली को रात में उपयोग के लिए संग्रहित करती है।
  • सोलर पंप पानी निकालने के लिए इस्तेमाल होता है।

कृषि में सोलर सिस्टम लगाने के फायदे

सोलर ऊर्जा अपनाने से किसानों को अनेक लाभ होते हैं, जो खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाते हैं

सोलर पैनल सिस्टम से खेत की सिंचाई करते हुए किसान
खेत में लगा सोलर सिस्टम किसानों को दे रहा है नई ऊर्जा और कमाई का मौका
  1. बिजली बिल पूरी तरह खत्म या बहुत कम हो जाता है।
  2. डिजल पंप की जगह सोलर पंप उपयोगी और पर्यावरण हितैषी है।
  3. सरकार से 60% तक सब्सिडी मिलने के कारण खर्च कम होता है।
  4. खेती में लगातार सिंचाई की सुविधा मिलती है।
  5. अतिरिक्त बिजली बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।
  6. लंबे समय तक चलने वाला समाधान – कम मेंटेनेंस लागत।

2025 में सरकार की सोलर सब्सिडी योजनाएँ

भारत सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं जिनके तहत सोलर पैनल और सोलर पंप लगाने पर वित्तीय सहायता दी जाती है। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है।

पीएम-कुसुम योजना (PM Kusum Yojana)

यह सबसे लोकप्रिय योजना है। इसमें किसान अपने खेतों में सोलर पंप लगा सकते हैं या अपनी जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली बेच सकते हैं।

  • सब्सिडी  कुल लागत का लगभग 60% सरकार देती है
  • किसान का अंशदान केवल 40%
  • अतिरिक्त बिजली DISCOM को बेचकर आय का नया स्रोत

राज्य सरकार की योजनाएँ

हर राज्य की अपनी सोलर सब्सिडी योजनाएँ होती हैं। जैसे:

  • उत्तर प्रदेश  सोलर पंप पर 70% तक सब्सिडी
  • राजस्थान किसानों के लिए “मुख्यमंत्री सोलर कृषि योजना”
  • मध्य प्रदेश  “मुख्यमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा योजना”
  • महाराष्ट्र “सूर्याग्रामीण योजना”

 सोलर सिस्टम लगाने का खर्च

सोलर सिस्टम का खर्च उसकी क्षमता और प्रकार पर निर्भर करता है। औसतन 3HP सोलर पंप की लागत 3–4 लाख रुपये होती है।
लेकिन सरकार की 60% सब्सिडी के बाद किसान को केवल लगभग 1–1.5 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

सोलर पंप क्षमताकुल लागत (₹)सरकारी सब्सिडी (₹)किसान का अंशदान (₹)
2 HP2,50,0001,50,0001,00,000
3 HP3,50,0002,10,0001,40,000
5 HP4,50,0002,70,0001,80,000

 सोलर सिस्टम लगाने की प्रक्रिया (Step-by-Step)

  1. अपने राज्य की कृषि या ऊर्जा विभाग की वेबसाइट पर जाएं।
  2. PM Kusum Yojana या राज्य की सोलर योजना चुनें।
  3. ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें।
  4. जमीन के कागज, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, फोटो आदि अपलोड करें।
  5. पंजीकरण के बाद विभागीय अधिकारी निरीक्षण करेंगे।
  6. स्वीकृति मिलने पर चुनी गई कंपनी सिस्टम लगाती है।
  7. स्थापना पूरी होने पर किसान को सब्सिडी राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।

 खेती में सोलर सिस्टम के प्रकार

  • ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम बैटरी आधारित सिस्टम जो बिजली ग्रिड से जुड़ा नहीं होता।
  • ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम बिजली ग्रिड से जुड़ा होता है, अतिरिक्त बिजली बेची जा सकती है।
  • हाइब्रिड सोलर सिस्टम दोनों का मिश्रण, यानी बैटरी भी और ग्रिड भी।

 खेती में सोलर सिस्टम से अतिरिक्त कमाई कैसे करें?

अगर किसान ऑन-ग्रिड सिस्टम लगाता है, तो उसकी अतिरिक्त बिजली DISCOM को भेजी जा सकती है। इसके बदले किसान को हर यूनिट पर निश्चित दर से भुगतान मिलता है।
इससे किसान हर महीने ₹3000 से ₹10,000 तक अतिरिक्त आय अर्जित कर सकता है।

सोलर सिस्टम खरीदते समय ध्यान देने योग्य बातें

  • MNRE (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय) से प्रमाणित कंपनी से ही सिस्टम लें।
  • गुणवत्ता प्रमाणपत्र (ISO, BIS) अवश्य जांचें।
  • 5 वर्ष की वारंटी वाला सिस्टम चुनें।
  • स्थानीय सेवा और मरम्मत सुविधा उपलब्ध हो।

पर्यावरणीय और सामाजिक लाभ

सोलर खेती न केवल आर्थिक रूप से लाभदायक है बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है, डिजल की खपत घटती है और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

 उपयोगी लिंक और संपर्क

खेती में सोलर सिस्टम लगाना क्यों जरूरी है?

आज के समय में जब बिजली महंगी और अस्थिर होती जा रही है, सोलर खेती किसानों को आत्मनिर्भर बना रही है।
सरकार की सब्सिडी योजनाएँ इसे और आसान बनाती हैं।
अगर हर किसान अपनी जमीन का एक हिस्सा सोलर पैनलों से ढक दे, तो वह बिजली का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक बन सकता है।

सूरज की रोशनी में छिपी है किसान की नई कमाई।”


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